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केरल के कोच्चि में एक निजी कंपनी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग एक कर्मचारी के गले में पट्टा बांधकर उसे कुत्ते की तरह घुमाते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद से कंपनी की कड़ी आलोचना हो रही है। इतना ही नहीं, राज्य के श्रम विभाग ने कर्मचारियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने के लिए कंपनी के खिलाफ जांच के आदेश भी दिए हैं। हालांकि, अब कहानी में एक ट्विस्ट सामने आया है।

कहानी में नया मोड़

वीडियो में प्रताड़ित किये जा रहे व्यक्ति ने मीडिया को बताया कि कंपनी में किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं हुआ। व्यक्ति ने दावा किया, ‘मैं अब भी कंपनी में काम कर रहा हूं। ये दृश्य कुछ महीने पहले के हैं और तत्कालीन प्रबंधक ने इन्हें जबरन रिकॉर्ड किया था। बाद में प्रबंधन ने उनकी सेवा समाप्त कर दी और अब वह इन दृश्यों का इस्तेमाल मालिक की छवि खराब करने के लिए कर रहे हैं।’ बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति ने पुलिस और श्रम विभाग के अधिकारियों के सामने भी यही बयान दिया है केरल के श्रम मंत्री शिवनकुट्टी ने इन दृश्यों को ‘चौंकाने वाला और परेशान करने वाला’ बताया और कहा कि केरल जैसे राज्य में इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘मैंने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं और जिला श्रम अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे जांच कर इस संबंध में रिपोर्ट सौंपें।’ इस घटना पर उच्च न्यायालय के वकील कुलथूर जयसिंह की शिकायत के आधार पर राज्य मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया है। केरल राज्य युवा आयोग ने भी इस घटना में हस्तक्षेप करते हुए स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज किया है। आयोग ने जिला पुलिस प्रमुख को इस संबंध में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। आयोग के अध्यक्ष एम शाजर ने एक बयान में कहा कि इस तरह की अमानवीय गतिविधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘एक सभ्य समाज के तौर पर हमें ऐसी असामाजिक प्रवृत्तियों के खिलाफ सामूहिक रूप से प्रतिक्रिया देनी चाहिए।’

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