मेरठ। देज की 62 छावनीयों में से एक मेरठ छावनी में करीब तीन सौ बंगले है। इनमें से ज्यादातर का व्यवसायिक उपयोग हो रहा है जो छावनी अधिानियम के अनुसार गैर कानूनी है। इसके पीछे छावनी परि”ाद् के अधिाकारियों की मिलीभगत बड़ी वजह रही है। वहीं, अब एक और बंगले को छावनी के अधिाकारियों ने किसी को बेच दिया जिसके बाद इसमें रहने वाले गरीब परिवारों को उजाड़ने की तैयारी है।
बुधावार को लालकुर्ती थाना क्षे= स्थित इस बंगले में रहने वाले परिवारों को कुछ बाउंसरों की तरह दिखने वाले लोगों ने हटाने की कोजिज की। यहां पिछले पचास सालों से भी ज्यादा समय से रहने वाले परिवारों में इस पूरे प्रकरण को लेकर दहजत व्याप्त है। बताया जा रहा है जिस बंगले पर कब्जा लेने की कोजिज की जा रही है वह गंगानगर स्थित एक नामी जिक्षण संस्थान के मालिक ने खरीद लिया है। अब बड़ा सवाल यह कि कैंट क्षे= में कोई भी जमीन का मालिक नहीं हो सकता, ऐसे में किस अधिाकार से बंगले को बेचा या खरीदा गया। वहीं, इस बंगले को पहले किसी हरिकिजन गुप्ता को लीज पर दिया गया था जिनकी मौत हो चुकी है, तभी से इसमें कई परिवार रहते चले आ रहें है जिनमें से कुछ अपना छोटा-मोटा व्यवसाय भी करते है। यह कोई पहला मामला नहीं है इसी तरह का प्रकरण वेस्टएंड रोड स्थित बंगला संख्या 215-ए का है जिसमें “ाभ एकेडमी नाम से स्कूल का संचालन किया जा रहा है। इस स्कूल के धवस्तीकरण का आदेज छावनी परि”ाद् द्वारा जारी किया जा चुका है जिसे श्री 1008 पार्ज्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर समिति दुर्गाबाड़ी सदर के तत्कालीन सचिव दिनेज चंद जैन पु= सुंदरलाल जैन द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर धवस्तीकरण के आदेज को चुनौती दी गई लेकिन कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। वहीं, “ाभ एकेडमी की लीज भी बीते जुलाई माह में समाप्त हो चुकी है बावजूद इसके छावनी परि”ाद् के अधिाकारियों की ‘ाह पर स्कूल का संचालन जारी है। अब एक बार फि़र लालकुर्ती में छावनी परि”ाद् के अधिाकारियों ने एक ऐसे ही प्रकरण की नींव रख दी है।

