मेरठ। केंद्र व राज्य सरकारें रामराज लाने का दावा करती है, अयोधया में भव्य राम मंदिर का निर्माण इसका उदाहरण भी है। हाल ही में 25 नवंबर को सीता-राम के विवाह के दिन पीएम मोदी ने अयोधया में बने राम मंदिर पर भव्य पताका फ़हराई थी जो भगवान राम के जीवन से जुड़ी आस्था का प्रतीक है। लेकिन एक विभाग की उदासीनता के चलते पिछले पांच साल से रामलीला का मंचन बंद है ऐसे में रामराज कैसे आएगा यह बड़ा सवाल पैदा हो रहा है।
लालकुर्ती स्थित नेज्नल पब्लिक स्कूल के ठीक पीछे पांच साल पहले तक रामलीला का मंचन होता था। गढ़वाल समाज के लोगों द्वारा रामलीला मंचन को लेकर अच्छी-खासी तैयारियां की जाती थी और रामलीला देखने के लिए आसपास के क्षे= से सैंकड़ो रामभक्त पहुंचते थे। लेकिन आज जिस मंच पर राजा दजरथ का दरबार सजता था, जिसपर सीता-राम का स्वयंबर हुआ करता था, जिसपर माता कैकई के वियोग को लेकर भगवान राम को चौदह व”ार् के वनवास पर जाता दिखाया जाता था, जिस मंच पर वन में भगवान राम और सीता व लक्ष्मण को कुटिया में रहते हुए दिखाया जाता था, जिस मंच पर रावण सीता हरण का मंचन किया जाता था, जिस मंच पर हनुमान जी की राम भक्ति को दिखाया जाता था और रावण, कुंभकरण व मेघनाथ के वधा से लेकर राम की अयोधया वापसी तक का मंचन होता था आज उस मंच पर कूड़े का ढेर लगा है। इसको लेकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रो”ा है लेकिन छावनी परि”ाद् को रामभक्तों की आस्था से कुछ लेना देना नहीं है। कैंट बोर्ड के पूर्व उपाधयक्ष सुनील कुमार वाधावा ने इस गंभीर प्रकरण को लेकर छावनी के अधिाकारियों से बात कर समाधाान कराने का आज्वासन जरूर दिया है।

