• डाक्टरों की लापरवाही से मरीज की जान को गंभीर खतरा
  • पेट में रसौली होने के बाद किया गया था आॅप्रेशन
  • आॅप्रेशन के बाद मरीज को हुई सांस लेने में परेशानी
  • अस्पताल प्रशासन ने थमाया 42 हजार का बिल
    मेरठ। शहर में कुकुरमुत्तों की तरह फैले निजी अस्पतालों के जाल में आम आदमी फंसकर खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। वहीं, अस्पतालों में इलाज करने वाले डाक्टरों की लापरवाही मरीजों की जान के लिए घातक साबित हो रही है। मरीज की हालत बिगड़ने पर डाक्टर पल्ला झाड़कर खुद को अलग कर लेते है और तीमारदार से हजारों रूपये इलाज के नाम पर ठगे जा रहें है।
    श्याम नगर निवासी शाहरुख की पत्नी सबा को 20 अगस्त को एनएस अस्पताल श्याम नगर में पेट में रसोली के ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया था। शुरूआती जांच में सभी रिपोर्ट सामान्य पाई गई। 30 अगस्त को दोपहर लगभग 2ः30 बजे डॉ. आरूषी ने महिला का ऑपरेशन किया। लेकिन ऑपरेशन के बाद सबा को होश आने पर सांस लेने में परेशानी होने लगी। महिला के पति शाहरुख ने डॉक्टर को जानकारी दी जिसेक बाद डॉक्टर ने आश्वासन दिया कि ऑपरेशन के बाद थोड़ी तकलीफ सामान्य है। इसके बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। शाहरुख ने फिर से डॉक्टर को बुलाया जिसके बाद डाक्टर आरूषी ने रात लगभग 1ः30 बजे दोबारा ऑपरेशन के टांके खोले और आश्वासन दिया कि सब कुछ ठीक है। कहा जल्द ही मरीज को घर भेज दिया जाएगा। अगले दिन भी सबा की स्थिति में सुधार नहीं हुआ जिसके बाद शाहरुख ने नाराजगी जताते हुए दोबारा जांच की मांग की। डाक्टर द्वारा फिर से जांच करने में फेफड़ों, किडनी समेत अन्य अंगों में गंभीर संक्रमण (इंफेक्शन) पाया गया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए और मरीज को कहीं और ले जाने को कहा। इसके लिए शाहरूख सहमत हुआ तो अस्पताल प्रबंधन ने उसके हाथ में 42 हजार रुपये का बिल व दवाइयों का अतिरिक्त बिल थमा दिया। साथ ही कहा कि भुगतान के बिना मरीज को नहीं ले जाया जा सकता। शाहरुख ने रोते हुए कहा कि तय राशि का भुगतान कर चुके हैं, फिर भी मरीज की स्थिति ठीक नहीं हुई। अंत में शाहरुख ने किसी तरह पत्नी सबा को अस्पताल से निकाला और आरएम अस्पताल में भर्ती कराया जहां डॉक्टरों ने मरीज को 24 घंटे का रामय दिया है। यह घटना एनएस. अस्पताल की चिकित्सकीय लापरवाही एवं फर्जी डॉक्टरों की उपस्थिति को दर्शाती है। आजाद अधिकार सेना के मंडल अध्यक्ष मास्टर अब्दुल अजीज का कहना है कि अस्पताल अब कत्लखाने बन चुके हैं, जहां मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके लिए सीएमओ को जिम्मेदार बताते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा ही अवैध अस्पतालों को संरक्षण दिया जा रहा है। पीड़ित पक्ष ने जिला प्रशासन से एनएस अस्पताल पर तत्काल सीलिंग और प्रबंधन के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही डॉ. आरूषी एवं संबंधित स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने, पीड़ित परिवार को मुआवजा व मुफ्त चिकित्सा सुविधा, अवैध अस्पतालों व फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाने के साथ सीएमओ मेरठ की भूमिका की जांच कराकर कार्रवाई की मांग की। जिलाधिकारी से मिलने वालों में मोहन देव, मेहराज मसूदी, साकिब मलिक, बिटटू, एहसान अलवी, असलम चैधरी, अकरम शेख, शादाब अलवी, पवन पार्चा, अफजल सैफी, रहीस हिन्दुस्तानी, शब्बीर सैफी, मुकेश शर्मा, नौशाद कुरैशी व बुद्धप्रकाश भगतजी आदि शामिल रहे।

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