मेरठ। छावनी परिषद् को कागजों में सुंदर दिखाया जाता है, कैंट बोर्ड के अधिकारी क्षेत्र में तमाम तरह के विकास का दावा करते रहें है जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। लालकुर्ती क्षेत्र का रिहायशी इलाका गंदगी से बिजबिजा रहा है। यहां रहने वाली जनता नर्कीय जीवन जीने को मजबूर है। क्षेत्र में लगा गंदगी का अंबार बीमारियां परोस है। वहीं, छावनी परिषद् के अधिकारी इस गंभीर समस्या को लेकर मौन है।
बुधवार को लालकुर्ती के जामुन मोहल्ला में रहने वाले लोगों ने छावनी के अधिकारियों की पोल खोली। स्थानीय लोगों का कहना है पिछले कई सालों से यहां गंदगी का अंबार लगा है। गंदगी की वजह से यहां होने वाली रामलीला का भी मंचन बंद है। स्थानीय लोगों का कहना है गंदगी की वजह से यहां रहना दुश्वार हो रहा है। नाले चोक है जिस वजह से बदबू फैल रही, यहां सांस लेना मुश्किल है। विकास के नाम पर पुलिया बनाई तो गई लेकिन वह भी हवा में लटकी हुई है। कई बार छावनी के अधिकारियों से इसको लेकर शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।
वहीं, छावनी परिषद् के पूर्व उपाध्यक्ष सुनील वाधवा ने भी माना कि गंदगी की समस्या काफी गंभीर है जिसको लेकर वह छावनी के अधिकारियों से बात कर जल्द समस्या का समाधान कराएंगे।

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