- 3 सितंबर से नेपाल सरकार ने किया सोशल मीडिया के 26 प्लेटफार्म को बैन
- बेरोजगारी की मार से जूझ रहे नेपाल के युवाओं का फूटा गुस्सा
- एक करोड़ नेपाली दूसरे देशों में करते है नौकरी, बैन के बाद परिवार से नहीं हो पा रहा संपर्क
काठमांडू। नेपाल की ओली सरकार ने 3 सितंबर को फेसबुक, यू-ट्यूब, व्हाट्सअप, एक्स, इंस्टाग्राम समेत कुल 26 सोशल मीडिया प्लेटफार्मो पर बैन लगा दिया। इसके बाद पिछले पांच दिनों से नेपाल में रहने वाले जेन-जी यानी 18 से 30 आयुवर्ग के युवाओं में गुस्सा पनप रहा था। सोमवार को यह गुस्सा विद्रोह के रूप फूट पड़ा। गुस्से से भरे युवाओं ने सड़क पर उतरकर आगजनी कर दी। कई सरकारी कार्यालयों में घुसने का प्रयास किया, हालात बेकाबू होते ही सेना ने मोर्चा संभाला और विद्रोहियों को रोकने के लिए गोली चला दी। इस गोलीबारी में अबतक 20 से ज्यादा लोगो की मौत हो गई जबकि 100 से अधिक घायल हैं। इनमें से आठ की हालत नाजुक बनी हुई है। - नेपाल में सोशल मीडिया पर बैन क्यों बना विद्रोह की वजहः बताया जा रहा है नेपाल में इस समय बेरोजगारी गंभीर समस्या है। वहीं, नेपाल के युवा सोशल मीडिया पर रील बनाने समेत अन्य तरीकों से पैसा कमा रहे थे। लेकिन बीते 3 सितंबर को नेपाल की ओली सरकार ने सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया जिसके बाद नेपाली जनता का गुस्सा फूट पड़ा।
- क्यों किया सोशल मीडिया को बैनः बताया जा रहा है नेपाल सरकार ने देश में अपनी सेवाएं देने वाले सोशल मीडिया प्लेटफार्मो से फीस जमा कराने के साथ अपना एक प्रतिनिधि को नेपाल में नियुक्त करने को कहा था। लेकिन फीस नहीं जमा कराने और प्रतिनिधि नियुक्त नहीं करने पर केपी ओली सरकार ने इन सोशल मीडिया प्लेटफार्मो को बैन कर दिया।
- अकेले भारत में ही करीब 50 लाख नेपाली करते है नौकरीः नेपाल की कुल आबादी करीब तीन करोड़ है जिनमें से एक करोड़ लोग अगल-अलग देशों में नौकरी करते है। अकेले भारत में ही 50 लाख नेपाली है जो यहां नौकरी करते है। सोशल मीडिया के जरिए यह लोग अपने परिवारों के संपर्क में रहते है, लेकिन बैन लगने के बाद परिवारों से सपर्क नहीं हो रहा है जिसको लेकर जेन-जी वर्ग के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
भारत नेपाल में हुए बवाल पर नजदीकी नजर रखे हुए है।


