मेरठ। बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए गठित की गई जिला टास्क फोर्स की बैठक विकास भवन में जिलाधिकारी डॉ वीके सिंह की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में वर्ष 2024-25 व 2025-26 में जनपद में बाल एवं किशोर श्रम के अन्तर्गत निरीक्षकों द्वारा की गई कार्यवाही की समीक्षा की गई।
वर्ष 2024-25 में कुल 350 प्रतिष्ठानों एवं वर्ष 2025-26 में 150 व्यापारिक प्रतिष्ठानों का निरीक्षकों टास्क फोर्स ने निरीक्षण किया। जबकि 415 नियोक्ताओं के खिलाफ चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष के अभियोजन दायर किये गये है। जबकि शेष को लेकर कार्रवाई जारी है। वहीं, बाल श्रम कराने वाले 34 प्रतिष्ठानों से जुर्माने के रूप में 8 लाख बीस हजार की वसूली के लिए वसूली प्रमाण पत्र जारी किये गये है। जबकि 10 प्रतिष्ठानों से दो लाख की वसूली की जा चुकी है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सम्बन्धित क्षेत्र के तहसीलदारों से श्रम प्रवर्तन अधिकारियों द्वारा व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क कर बची हुई जुर्माने की धनराशी की वसूली के लिए सभी प्रतिष्ठानों से 15 दिन का समय दिया गया है। इसके साथ ही बाल श्रम से मुक्त कराये गये बच्चों के शैक्षिक व पुनर्वासन के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया। जिलाधिकारी ने टास्क फोर्स के सभी शासकीय विभागों के सदस्यों और स्वयं सेवी संस्थाओं को निर्देशित किया गया कि जनपद में बाल श्रम के उन्मूलन व छुड़ाए गए बाल श्रमिकों के पुनर्वासन को लेकर जरूरी कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाय। साथ ही शासकीय व गैर शासकीय विभागों के सदस्यों को श्रम विभाग से समन्वय कर बाल श्रम निवारण के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा गया। बैठक में अपर जिलाधिकारी (नगर), सहायक श्रमायुक्त, जिला प्रोबेशन अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व श्रम प्रवर्तन अधिकारी, सीओ एएचटीयू अपनी टीम तथा बाल श्रम उन्मूलन में लगी स्वमं सेवी संस्थाओं ने हिस्सा लिया।


